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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 77
श्लोक
2.28.77
“না দেখিঽ সে চাঙ্দ-মুখ বঞ্চিব কেমনে
কিবা কার্য এ বা আর পাপিষ্ঠ জীবনে
“ना देखिऽ से चाङ्द-मुख वञ्चिब केमने
किबा कार्य ए वा आर पापिष्ठ जीवने
अनुवाद
"उस चाँद जैसे चेहरे को देखे बिना हम कैसे जी पाएँगे? इस पापमय जीवन का क्या फ़ायदा?"
"How can we live without seeing that moon-like face? What is the use of this sinful life?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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