श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.28.76 
“কি দারুণ নিশি পোহাইল গোপীনাথ”
বলিযা কান্দেন সবে শিরে দিযা হাত
“कि दारुण निशि पोहाइल गोपीनाथ”
बलिया कान्देन सबे शिरे दिया हात
 
 
अनुवाद
वे चिल्ला उठे, “हे गोपीनाथ, हमने कितनी भयानक रात बिताई है!” और सिर पकड़कर रोने लगे।
 
He cried out, “Oh Gopinath, what a dreadful night we have had!” and began to cry, clutching his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)