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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 74
श्लोक
2.28.74
কি হৈল সে বৈষ্ণব-গণের বিষাদ
কান্দিতে লাগিলা সবে করিঽ আর্ত-নাদ
कि हैल से वैष्णव-गणेर विषाद
कान्दिते लागिला सबे करिऽ आर्त-नाद
अनुवाद
वैष्णवों को कितना दुःख हुआ! वे सब दुःख से व्याकुल होकर जोर-जोर से रोने लगे।
The Vaishnavas were so saddened! They all began to cry loudly, overwhelmed with grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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