श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  2.28.69 
জড-প্রায আই, কিছু না স্ফুরে উত্তর
নযনের ধারা মাত্র বহে নিরন্তর
जड-प्राय आइ, किछु ना स्फुरे उत्तर
नयनेर धारा मात्र वहे निरन्तर
 
 
अनुवाद
माँ शची लगभग जड़वत हो गईं। उनकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे, बस वे कुछ भी उत्तर देने में असमर्थ थीं।
 
Mother Shachi was practically frozen, tears flowing from her eyes, unable to answer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)