श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.28.68 
প্রথমেই বলিলেন শ্রীবাস-উদার
“আই কেন রহিযাছে বাহির-দুযার”
प्रथमेइ बलिलेन श्रीवास-उदार
“आइ केन रहियाछे बाहिर-दुयार”
 
 
अनुवाद
उदार श्रीवास ने सबसे पहले पूछा, "हे माता, आप द्वार पर क्यों बैठी हैं?"
 
The generous Srivasa first asked, "O Mother, why are you sitting at the door?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)