श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.28.66 
ভক্ত-সব না জানেন এ সব বৃত্তান্ত
ঊষঃ-কালে স্নান করিঽ যতেক মহান্ত
भक्त-सब ना जानेन ए सब वृत्तान्त
ऊषः-काले स्नान करिऽ यतेक महान्त
 
 
अनुवाद
जब भक्तों ने सुबह स्नान किया तो उन्हें भगवान के चले जाने का पता ही नहीं चला।
 
When the devotees took bath in the morning, they did not realize that God had left.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)