श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.28.65 
প্রভু চলিলেন মাত্র শচী জগন্-মাতা
জড-প্রায রহিলেন, নাহি স্ফুরে কথা
प्रभु चलिलेन मात्र शची जगन्-माता
जड-प्राय रहिलेन, नाहि स्फुरे कथा
 
 
अनुवाद
जब भगवान चले गए, तो विश्वमाता शची लगभग निष्क्रिय हो गईं और बोलने में असमर्थ हो गईं।
 
When the Lord left, Vishwamata Sachi became almost inactive and unable to speak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)