श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.28.63 
চলিলেন বৈকুণ্ঠ-নাযক গৃহ হৈতে
সন্ন্যাস করিযা সর্ব জীব উদ্ধারিতে
चलिलेन वैकुण्ठ-नायक गृह हैते
सन्न्यास करिया सर्व जीव उद्धारिते
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान, जो वैकुण्ठ के नायक हैं, पतित आत्माओं के उद्धार के लिए संन्यास लेने हेतु घर छोड़कर चले गए।
 
Thus the Lord, who is the hero of Vaikuntha, left home to take up Sannyasa for the salvation of fallen souls.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)