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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 54
श्लोक
2.28.54
তোমার প্রসাদে সে তাহার প্রতিকার
আমি পুনঃ জন্ম জন্ম ঋণী সে তোমার
तोमार प्रसादे से ताहार प्रतिकार
आमि पुनः जन्म जन्म ऋणी से तोमार
अनुवाद
"केवल आपकी दया से ही मैं अपने ऋण से मुक्त हो पाऊँगा। फिर भी मैं जन्म-जन्मान्तर तक आपका ऋणी रहूँगा।"
"Only by your mercy will I be free from my debt. Even then, I will remain indebted to you for life after life."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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