अखिल नित्य श्री गौरासुंदर अपनी नित्य माता को कभी नहीं छोड़ते। इसलिए पारम वैष्णव प्रेमिका श्री शची देवी जो कि पारम वैष्णव आनंद स्वरूपा हैं, अखिल नित्य लीला में श्री गौरासुंदर के वैष्णव प्रेम की आधार हैं। वे कभी भी एक पल के लिए भी उनके सान्निध्य से हटती नहीं हैं।
