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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 52
श्लोक
2.28.52
আপনার তিলার্দ্ধেকো না লৈলা সুখ
আজন্ম আমার তুমি বাডাইলা ভোগ
आपनार तिलार्द्धेको ना लैला सुख
आजन्म आमार तुमि बाडाइला भोग
अनुवाद
“अपने व्यक्तिगत सुख की ज़रा भी परवाह न करते हुए, तुमने जीवन भर मेरे सुख को बढ़ाया है।
“Without the slightest regard for your own personal happiness, you have increased my happiness throughout my life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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