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श्लोक 2.28.50  |
জননীরে দেখিঽ প্রভু ধরিঽ তান কর
বসিযা কহেন বহু প্রবোধ-উত্তর |
जननीरे देखिऽ प्रभु धरिऽ तान कर
वसिया कहेन बहु प्रबोध-उत्तर |
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| अनुवाद |
| अपनी माता को देखकर प्रभु ने उनका हाथ पकड़ लिया और उन्हें अनेक प्रकार से सांत्वना दी। |
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| Seeing his mother, the Lord held her hand and consoled her in many ways. |
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