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श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 48
श्लोक
2.28.48
প্রভু বলে,—“আমার নাহিক কারু সঙ্গ
এক অদ্বিতীয সে আমার সর্ব রঙ্গ”
प्रभु बले,—“आमार नाहिक कारु सङ्ग
एक अद्वितीय से आमार सर्व रङ्ग”
अनुवाद
हालाँकि, भगवान ने उत्तर दिया, "मैं पूर्णतः स्वतंत्र हूँ, मेरा कोई दूसरा नहीं। यह मेरी लीला है।"
However, the Lord replied, "I am completely independent, I have no other. This is my play."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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