श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.28.46 
ঽদণ্ড চারি রাত্রি আছেঽ ঠাকুর জানিযাউ
ঠিলেন চলিবারে নসা-ঘ্রাণ লৈযা
ऽदण्ड चारि रात्रि आछेऽ ठाकुर जानियाउ
ठिलेन चलिबारे नसा-घ्राण लैया
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्ममुहूर्त में प्रस्थान के लिए उठे। अपनी नाक से वायु के प्रवाह को देखकर उन्होंने समझ लिया कि उनके प्रस्थान का शुभ समय आ गया है।
 
The Lord rose to depart at Brahmamuhurta. Observing the flow of air through his nose, he understood that the auspicious time for his departure had arrived.
तात्पर्य
ब्रह्म-मुहूर्त में, श्री गौरासुंदर ने अपनी सांस की अपनी नाक से गति को देखा और निर्णय लिया कि उनके प्रस्थान का शुभ समय आ गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)