श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.28.45 
আই জানে আজি প্রভু করিবে গমন
আইর নাহিক নিদ্রা, কান্দে অনুক্ষণ
आइ जाने आजि प्रभु करिबे गमन
आइर नाहिक निद्रा, कान्दे अनुक्षण
 
 
अनुवाद
यह जानते हुए कि भगवान चले जायेंगे, माता शची सो नहीं सकीं और रोती रहीं।
 
Knowing that the Lord would leave, Mother Shachi could not sleep and kept crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)