श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.28.43 
ভোজন করিযা প্রভু মুখ-শুদ্ধি করিঽ
চলিলাশযন-ঘরে গৌরাঙ্গ-শ্রী-হরি
भोजन करिया प्रभु मुख-शुद्धि करिऽ
चलिलाशयन-घरे गौराङ्ग-श्री-हरि
 
 
अनुवाद
भोजन समाप्त होने पर भगवान गौरांग ने अपना मुख धोया और अपने शयन कक्ष में चले गए।
 
After finishing the meal, Lord Gauranga washed his face and went to his bedroom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)