श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.28.41 
এই মতে মহানন্দে বৈকুণ্ঠ-ঈশ্বর
কৌতুকে আছেন রাত্রি দ্বিতীয প্রহর
एइ मते महानन्दे वैकुण्ठ-ईश्वर
कौतुके आछेन रात्रि द्वितीय प्रहर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वैकुण्ठ के स्वामी ने बड़े आनन्द से वह शाम बिताई।
 
In this way the Lord of Vaikuntha spent that evening with great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)