श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.28.40 
সন্তোষে চলিলাশচী করিতে রন্ধন
হেন ভক্ত-বত্সল শ্রী-শচীর নন্দন
सन्तोषे चलिलाशची करिते रन्धन
हेन भक्त-वत्सल श्री-शचीर नन्दन
 
 
अनुवाद
माता शची तुरन्त प्रसन्न होकर खाना बनाने चली गईं। इस प्रकार शचीपुत्र अपने भक्तों के प्रति इतना स्नेही होता है।
 
Mother Shachi was immediately pleased and went to prepare food. Thus, the son of Shachi is so affectionate toward his devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)