श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.28.37 
এতেক চিন্তিযা ভক্ত-বাত্সল্য রাখিতে
জননীরে বলিলেন রন্ধন করিতে
एतेक चिन्तिया भक्त-वात्सल्य राखिते
जननीरे बलिलेन रन्धन करिते
 
 
अनुवाद
ऐसा सोचकर, अपने भक्तों के प्रति अपना स्नेह बनाए रखने के लिए, उन्होंने अपनी माता से लौकी पकाने का अनुरोध किया।
 
Thinking so, to maintain his affection towards his devotees, he requested his mother to cook the gourd.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)