श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.28.36 
শ্রীধরের পদার্থ কি হৈবে অন্যথা
এ লাউ ভোজন আজি করিব সর্বথা”
श्रीधरेर पदार्थ कि हैबे अन्यथा
ए लाउ भोजन आजि करिब सर्वथा”
 
 
अनुवाद
“फिर भी श्रीधर जो कुछ भी लाए हैं, वह व्यर्थ नहीं जा सकता, इसलिए मुझे आज उसे खाना ही होगा।”
 
“Still, whatever Sridhar has brought cannot go waste, so I have to eat it today.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)