श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.28.34 
লাউ-ভেট দেখিঽ হাসে শ্রী-গৌরসুন্দরে
“কোথায পাইলা?”প্রভু জিজ্ঞাসে তাহারে
लाउ-भेट देखिऽ हासे श्री-गौरसुन्दरे
“कोथाय पाइला?”प्रभु जिज्ञासे ताहारे
 
 
अनुवाद
लौकी को देखकर श्री गौरसुन्दर ने उससे पूछा, “यह तुम्हें कहाँ से मिला?”
 
Seeing the gourd, Shri Gaurasundar asked him, “Where did you get this from?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)