श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.28.33 
এক লাউ হাতে করিঽ সুকৃতি শ্রীধর
হেনৈ সমযে আসিঽ হৈলা গোচর
एक लाउ हाते करिऽ सुकृति श्रीधर
हेनै समये आसिऽ हैला गोचर
 
 
अनुवाद
उस समय धर्मात्मा श्रीधर हाथ में लौकी लेकर वहाँ आये।
 
At that time, the virtuous Sridhar came there with a gourd in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)