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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 32
श्लोक
2.28.32
প্রসাদ পাইযা সবে হরষিত হঞ্
আউচ্চ হরি-ধ্বনি সবে যাযেন করিযা
प्रसाद पाइया सबे हरषित हञ्
आउच्च हरि-ध्वनि सबे यायेन करिया
अनुवाद
भगवान की कृपा पाकर सभी लोग आनंदित हो गए और जोर-जोर से “हरि! हरि!” का जाप करते हुए चले गए।
Everyone was delighted with the Lord's blessings and went away loudly chanting "Hari! Hari!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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