श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.28.24 
দণ্ড-পরণাম হঞা পডে সর্ব-জন
এক দৃষ্টে সবেই চাহেন শ্রী-বদন
दण्ड-परणाम हञा पडे सर्व-जन
एक दृष्टे सबेइ चाहेन श्री-वदन
 
 
अनुवाद
जो भी आया, उसने सिर के बल गिरकर प्रणाम किया। फिर वे लगातार प्रभु के सुंदर मुख को निहारते रहे।
 
Everyone who came prostrated themselves before Him, and then gazed continuously at His beautiful face.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)