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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 20
श्लोक
2.28.20
বসিযা আছেন প্রভু কমল-লোচন
সর্বাঙ্গে শোভিত মালা সুগন্দি চন্দন
वसिया आछेन प्रभु कमल-लोचन
सर्वाङ्गे शोभित माला सुगन्दि चन्दन
अनुवाद
कमल-नेत्र भगवान वहाँ बैठे थे, उनके अंग सुन्दर पुष्पमाला और सुगन्धित चंदन से सुसज्जित थे।
The lotus-eyed Lord was seated there, His body adorned with beautiful garlands and fragrant sandalwood paste.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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