श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.28.198 
এই-মত চৈতন্য-কথার অন্ত নাই
যার যত-দূর শক্তি সবে তত গাই
एइ-मत चैतन्य-कथार अन्त नाइ
यार यत-दूर शक्ति सबे तत गाइ
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार भगवान चैतन्य की कथाओं का भी कोई अन्त नहीं है। मनुष्य उन्हें केवल अपनी शक्ति के अनुसार ही कह सकता है।
 
Similarly, there is no end to the stories of Lord Chaitanya. One can only tell them according to one's own capacity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)