श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 195
 
 
श्लोक  2.28.195 
সṁসারের পার হৈঽ ভক্তির সাগরে
যে ডুবিবে সে ভজুক নিতাই-চান্দেরে
सꣳसारेर पार हैऽ भक्तिर सागरे
ये डुबिबे से भजुक निताइ-चान्देरे
 
 
अनुवाद
जो कोई भी जन्म-मृत्यु के सागर को पार करना चाहता है और भक्ति के सागर में डूबना चाहता है, उसे भगवान नित्यानंद की पूजा करनी चाहिए।
 
Anyone who wants to cross the ocean of birth and death and immerse himself in the ocean of devotion should worship Lord Nityananda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)