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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 183
श्लोक
2.28.183
আর কত লীলা-রস হৈল সেই স্থানে
নিত্যানন্দ-স্বরূপে সে সব তত্ত্ব জানে
आर कत लीला-रस हैल सेइ स्थाने
नित्यानन्द-स्वरूपे से सब तत्त्व जाने
अनुवाद
केवल नित्यानंद स्वरूप ही वहां घटित अन्य सभी लीलाओं को जानते हैं।
Only Nityananda Swarupa knows all the other pastimes that happened there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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