श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.28.18 
আসিযা বসিলা গৃহে শ্রী-গৌরসুন্দর
চতুর্-দিকে বসিলেন সব অনুচর
आसिया वसिला गृहे श्री-गौरसुन्दर
चतुर्-दिके वसिलेन सब अनुचर
 
 
अनुवाद
श्री गौरसुन्दर अपने अनुयायियों से घिरे हुए घर पर बैठ गये।
 
Shri Gaursundar sat at home surrounded by his followers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)