vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
»
श्लोक 18
श्लोक
2.28.18
আসিযা বসিলা গৃহে শ্রী-গৌরসুন্দর
চতুর্-দিকে বসিলেন সব অনুচর
आसिया वसिला गृहे श्री-गौरसुन्दर
चतुर्-दिके वसिलेन सब अनुचर
अनुवाद
श्री गौरसुन्दर अपने अनुयायियों से घिरे हुए घर पर बैठ गये।
Shri Gaursundar sat at home surrounded by his followers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×