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श्लोक 2.28.178  |
চতুর্-দিকে মহা-হরি-ধ্বনি-কোলাহল
করিযা আনন্দে ভাসে বৈষ্ণব-সকল |
चतुर्-दिके महा-हरि-ध्वनि-कोलाहल
करिया आनन्दे भासे वैष्णव-सकल |
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| अनुवाद |
| चारों दिशाओं में “हरि! हरि!” का उद्घोष गूंजने से वैष्णव दिव्य आनंद की लहरों में तैरने लगे। |
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| As the chants of "Hari! Hari!" echoed in all directions, the Vaishnavas began to float in waves of divine bliss. |
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