श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  2.28.177 
এত যদি ন্যাসিবর বলিলা বচন
জয-ধ্বনি পুষ্প-বৃষ্টি হৈল তখন
एत यदि न्यासिबर बलिला वचन
जय-ध्वनि पुष्प-वृष्टि हैल तखन
 
 
अनुवाद
जब उन श्रेष्ठ संन्यासियों ने यह कहा, तो सबने जयजयकार किया और उन पर पुष्पवर्षा की गई।
 
When those great monks said this, everyone cheered and showered flowers on them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)