श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  2.28.174 
পাইযা উচিত নাম কেশব-ভারতী
প্রভু-বক্ষে হস্ত দিযা বলে শুদ্ধ-মতি
पाइया उचित नाम केशव-भारती
प्रभु-वक्षे हस्त दिया बले शुद्ध-मति
 
 
अनुवाद
उपयुक्त नाम का चयन करके, शुद्ध हृदय वाले केशव भारती ने भगवान की छाती पर अपना हाथ रखा और बोले।
 
Having selected the appropriate name, the pure-hearted Keshava Bharati placed his hand on the Lord's chest and spoke.
तात्पर्य
भौतिक ज्ञान की देवी दुष्टा सरस्वती के रूप में जानी जाती है। जब परम प्रभु की सेवा के लिए प्रेरित करने वाले वाक्य बोले जाते हैं, तो ज्ञान की देवी प्रभु की सेवा में लगी रहती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)