श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  2.28.170 
“চতুর্দশ-ভুবনেতে এ-মত বৈষ্ণব
আমার নযনে নাহি হয অনুভব
“चतुर्दश-भुवनेते ए-मत वैष्णव
आमार नयने नाहि हय अनुभव
 
 
अनुवाद
"मैं चौदह लोकों में ऐसा वैष्णव नहीं पा सकता। यह मेरा दृढ़ विश्वास है।"
 
"I cannot find such a Vaishnava in the fourteen worlds. This is my firm belief."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)