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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 164
श्लोक
2.28.164
কোটি কোটি চন্দ্র জিনিঽ শোভে শ্রী-বদন
প্রেম-ধারে পূর্ণ দুই কমল-নযন
कोटि कोटि चन्द्र जिनिऽ शोभे श्री-वदन
प्रेम-धारे पूर्ण दुइ कमल-नयन
अनुवाद
भगवान का सुन्दर मुख करोड़ों चन्द्रमाओं से भी अधिक आकर्षक था और उनके दोनों नेत्र प्रेमाश्रुओं से भरे हुए थे।
The beautiful face of the Lord was more attractive than millions of moons and both his eyes were filled with tears of love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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