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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 155
श्लोक
2.28.155
প্রভু কহে,—“স্বপ্নে মোরে কোন-মহাজন
কর্ণে সন্ন্যাসের মন্ত্র করিল কথন
प्रभु कहे,—“स्वप्ने मोरे कोन-महाजन
कर्णे सन्न्यासेर मन्त्र करिल कथन
अनुवाद
भगवान ने कहा, "एक स्वप्न में एक महाजन मेरे पास आये और मेरे कान में संन्यास मंत्र बोला।
The Lord said, “In a dream a moneylender came to me and whispered the renunciation mantra into my ears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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