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श्लोक 2.28.152  |
কথṁ-কথম্ অপি সর্ব-দিন-অবশেষে
ক্ষৌর-কর্ম নির্বাহ হৈল প্রেম-রসে |
कथꣳ-कथम् अपि सर्व-दिन-अवशेषे
क्षौर-कर्म निर्बाह हैल प्रेम-रसे |
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| अनुवाद |
| किसी तरह, प्रेम के उन्माद में, दिन के अंत में भगवान का सिर मुंडवा दिया गया। |
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| Somehow, in a frenzy of love, the Lord's head was shaved at the end of the day. |
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