श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.28.151 
ঽবোল বোলঽ করিঽ প্রভু করযে হুঙ্কার
ক্ষৌর-কর্ম নাপিত না পারে করিবার
ऽबोल बोलऽ करिऽ प्रभु करये हुङ्कार
क्षौर-कर्म नापित ना पारे करिबार
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान निरंतर गर्जना करते रहे, “हरि बोल!” इसलिए नाई अपना कार्य करने में असमर्थ हो गया।
 
Thus the Lord continued to roar, “Hari Bol!” Therefore the barber was unable to perform his work.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)