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श्लोक 2.28.146  |
হেন সে কারুণ্য-রস গৌরচন্দ্র করে
শুষ্ক-কাষ্ঠ-পাষাণাদি দ্রবযে অন্তরে |
हेन से कारुण्य-रस गौरचन्द्र करे
शुष्क-काष्ठ-पाषाणादि द्रवये अन्तरे |
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| अनुवाद |
| श्री गौरचन्द्र ने ऐसी करुणा दिखाई कि सूखी लकड़ी और पत्थर भी पिघल गए। |
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| Shri Gaurchandra showed such compassion that even dry wood and stones melted. |
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