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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 144
श्लोक
2.28.144
কেহ বলে,—“কোন্ বিধি সৃজিল সন্ন্যাস?”
এত বলিঽ নারী-গণ ছাডে মহা-শ্বাস
केह बले,—“कोन् विधि सृजिल सन्न्यास?”
एत बलिऽ नारी-गण छाडे महा-श्वास
अनुवाद
एक महिला बोली, “इस संन्यास पद्धति का आविष्कार किसने किया?” ऐसा कहते हुए, सभी महिलाओं ने गहरी साँस ली।
One woman said, “Who invented this system of renunciation?” As she said this, all the women took a deep breath.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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