श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  2.28.137 
নানা-বিধ ভক্ষ্য দ্রব্য লাগিল আসিতে
হেন নাহি জানি কে আনযে কোন্ ভিতে
नाना-विध भक्ष्य द्रव्य लागिल आसिते
हेन नाहि जानि के आनये कोन् भिते
 
 
अनुवाद
किसी को नहीं पता था कि इतनी सारी खाद्य सामग्री कहां से आई या उन्हें कौन लाया।
 
No one knew where all these food items came from or who brought them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)