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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 130
श्लोक
2.28.130
প্রভু বলে,—“মাযা মোরে না কর প্রকাশ
হেন দীক্ষা দেহঽ যেন হঙ কৃষ্ণ-দাস”
प्रभु बले,—“माया मोरे ना कर प्रकाश
हेन दीक्षा देहऽ येन हङ कृष्ण-दास”
अनुवाद
भगवान ने कहा, "कृपया मुझे धोखा न दें। मुझे दीक्षा दें ताकि मैं भगवान कृष्ण का सेवक बन सकूँ।"
The Lord said, "Please do not deceive me. Give me initiation so that I can become a servant of Lord Krishna."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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