श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  2.28.124 
এই-মত নারী-গণ দুঃখ ভাবিঽ কান্দে
পডিঽ কান্দে সর্ব জীব চৈতন্যের ফান্দে
एइ-मत नारी-गण दुःख भाविऽ कान्दे
पडिऽ कान्दे सर्व जीव चैतन्येर फान्दे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार स्त्रियाँ व्याकुल होकर रोने लगीं। श्री चैतन्य के जाल में फँसे हुए सभी जीव दयनीय होकर रोने लगे।
 
Thus the women became distraught and began to cry. All the living beings caught in Sri Chaitanya's net began to weep pitifully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)