श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.28.122 
কোন্ পুণ্যবতী হেন পাইলেক নিধি
কোন্ বা দারুণ দোষে হরিলেক বিধি
कोन् पुण्यवती हेन पाइलेक निधि
कोन् वा दारुण दोषे हरिलेक विधि
 
 
अनुवाद
“उनकी पत्नी ने उन्हें पति रूप में प्राप्त करने के लिए कौन सा पुण्य कार्य किया है, और किस दुर्भाग्य से उन्होंने उन्हें खो दिया है?
 
“What good deed did his wife perform to obtain him as her husband, and by what misfortune did she lose him?
तात्पर्य
विष्णुप्रिया के संदर्भ में, चिंतनशील लोगों ने देखा कि उसने श्री गौरसुंदर को अपने पति के रूप में पाकर महान सौभाग्य प्राप्त किया था। पर जब उन्हें ये पता चला कि गौरसुंदर संन्यास लेने जा रहे हैं, तो वे सोच में पड़ गए कि विष्णुप्रिया देवी ने ऐसा कौन सा अपराध किया है कि विधाता उनका प्राप्त खजाना छीन रहे हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)