श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  2.28.118 
ক্ষণে কম্প, ক্ষণে স্বেদ, ক্ষণে মূর্চ্ছা যায
আছাড দেখিতে সর্ব লোকে পায ভয
क्षणे कम्प, क्षणे स्वेद, क्षणे मूर्च्छा याय
आछाड देखिते सर्व लोके पाय भय
 
 
अनुवाद
एक क्षण भगवान काँप उठे, दूसरे क्षण उन्हें पसीना आ गया, और अगले ही क्षण वे अचेत हो गए। भगवान को ज़मीन पर गिरता देख वहाँ मौजूद सभी लोग भयभीत हो गए।
 
One moment the Lord trembled, the next he broke out in a sweat, and the next he fell unconscious. Everyone present was horrified to see the Lord fall to the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)