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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 117
श्लोक
2.28.117
সর্ব লোক তিতিল প্রভুর প্রেম-জলে
স্ত্রী-পুরুষে বাল-বৃদ্ধে ঽহরি হরিঽ বলে
सर्व लोक तितिल प्रभुर प्रेम-जले
स्त्री-पुरुषे बाल-वृद्धे ऽहरि हरिऽ बले
अनुवाद
इस प्रकार भगवान के प्रेम के जल में भीगकर, सभी लोग - पुरुष और महिला, युवा और वृद्ध - सभी ने जप किया, "हरि! हरि!"
Thus drenched in the water of God's love, all the people – men and women, young and old – all chanted, "Hari! Hari!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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