श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.28.114 
দেখিযা প্রভুর রূপ পরম সুন্দর
এক দৃষ্টে পান সবে করে নিরন্তর
देखिया प्रभुर रूप परम सुन्दर
एक दृष्टे पान सबे करे निरन्तर
 
 
अनुवाद
वे सब अपनी पलकें झपकाए बिना भगवान के रूप की उत्तम सुन्दरता का निरन्तर पान करते रहे।
 
They all continued to enjoy the exquisite beauty of the Lord's form without blinking their eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)