श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.28.112 
গাইতে লাগিল মুকুন্দাদি ভক্ত-গণ
নিজাবেশে মত্ত নাচে শ্রী-শচীনন্দন
गाइते लागिल मुकुन्दादि भक्त-गण
निजावेशे मत्त नाचे श्री-शचीनन्दन
 
 
अनुवाद
जब शचीपुत्र आनंदमग्न होकर नाच रहे थे, तब मुकुन्द तथा अन्य भक्तगण गाने लगे।
 
While Sachiputra was dancing in ecstasy, Mukunda and other devotees began to sing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)