श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.28.109 
তুমি সে দিবারে পার কৃষ্ণ প্রাণ-নাথ
নিরবধি কৃষ্ণচন্দ্র বসযে তোমাঽত
तुमि से दिबारे पार कृष्ण प्राण-नाथ
निरवधि कृष्णचन्द्र वसये तोमाऽत
 
 
अनुवाद
“भगवान कृष्ण सदैव तुम्हारे हृदय में विराजमान रहते हैं, इसलिए तुम मुझे कृष्ण, मेरा जीवन और आत्मा देने के योग्य हो।
 
“Lord Krishna always resides in your heart, so you are worthy of giving me Krishna, my life and soul.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)