श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.28.10 
ঽইন্দ্রাণীঽ নিকটে কাটোঞা-নামে গ্রাম
তথা আছে কেশব ভারতীশুদ্ধ নাম
ऽइन्द्राणीऽ निकटे काटोञा-नामे ग्राम
तथा आछे केशव भारतीशुद्ध नाम
 
 
अनुवाद
"इन्द्राणी के निकट कटवा नाम का एक गाँव है। वहाँ शुद्धात्मा केशव भारती निवास करते हैं।"
 
"Near Indrani is a village called Katwa. The pure soul Keshav Bharati lives there."
तात्पर्य
उस समय इन्द्राणी एक प्रसिद्ध स्थान था। इन्द्राणी का उपखंड वर्तमान काटवा के पास स्थित था।

काटवा (काटोया) बर्दवान जिले में स्थित एक उपखंड है। बांडेल-बरहरवा लाइन पर इसी नाम का एक रेलवे स्टेशन है। यह स्थान अभी भी गंगा नदी के तट पर स्थित है।

केशव भारती एक संन्यासी थे। उन्होंने संन्यास गुरु का कर्तव्य निभाया। विष्णुस्वामी की प्राचीन संप्रदाय में एक सौ आठ संन्यास नाम प्रचलित हैं। बाद में, श्री शंकराचार्य, जिन्होंने अवैयक्तिकता के दर्शन का प्रतिपादन किया, उन्होंने उन संन्यास नामों में से दस को लिया और उन्हें अपने संप्रदाय में शामिल किया। भारती उन नामों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण भारत के शृंगेरी में, दस संन्यासियों के बीच तीन वर्ग जाने जाते हैं, जिन्हें सरस्वती, भारती और पुरी कहा जाता है। सरस्वती को प्रथम श्रेणी, भारती को द्वितीय श्रेणी और पुरी को तृतीय श्रेणी माना जाता है। भारती उनके वर्ग का नाम था, और केशव उनका नाम था। आज भी कई लोग खुद को केशव भारती के वंशज के रूप में पहचानते हैं। इन विषयों का विस्तार से वर्णन वैष्णव-मंजुषा-समाहृति नामक पुस्तक में किया गया है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)