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श्लोक 2.27.4  |
সন্ন্যাস করিলে গ্রামে না আসিবে আর
কোন্ দিকে যাযেন বা করিযা বিচার” |
सन्न्यास करिले ग्रामे ना आसिबे आर
कोन् दिके यायेन वा करिया विचार” |
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| अनुवाद |
| "अगर वे संन्यास ले भी लें, तो गाँव नहीं लौटेंगे। कौन जाने वे किस दिशा में जाएँगे?" |
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| "Even if he retires, he won't return to the village. Who knows which direction he'll take?" |
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